Last Updated: November 26, 2025
Kamakhya Temple Ambubachi Mela असम के गुवाहाटी में स्थित Maa Kamakhya Temple का सबसे महत्वपूर्ण वार्षिक उत्सव है, जो देवी की वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) को मनाता है और हर साल जून में लाखों तांत्रिक साधकों और भक्तों को आकर्षित करता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और मार्गदर्शन के उद्देश्य से लिखा गया है। Kamakhya Temple Timings, Kamakhya Temple Tickets की कीमतें और Ambubachi Mela 2025 Date में बदलाव हो सकते हैं। कृपया यात्रा से पहले आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि कर लें। धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का सम्मान करें।
Ambubachi Mela 2025: तारीख और समय
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| Ambubachi 2025 Date and Time | 22-26 जून 2025 |
| मंदिर बंद रहेगा | 22 जून से 25 जून (4 दिन) |
| मंदिर खुलने की तारीख | 26 जून 2025 |
| Ambubachi Mela 2025 Date | 22-30 जून तक चलेगा |
| अनुमानित श्रद्धालु | 15-20 लाख |
| स्थान | Kamakhya Temple Guwahati, असम |
| निकटतम रेलवे स्टेशन | Kamakhya Railway Station (2 किमी) |
कामाख्या देवी मंदिर: भारत का सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठ
Kamakhya Devi Temple सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि तंत्र साधना का सबसे बड़ा केंद्र है। यह भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक है और यहां माता सती का योनि (गर्भ) गिरा था। जब भगवान शिव सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उनके शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। Kamakhya Mandir Kahan Hai – यह नीलांचल पहाड़ी पर गुवाहाटी, असम में स्थित है।
Maa Kamakhya को कामेश्वरी देवी के नाम से भी जाना जाता है। Kamakhya Devi Mandir Kahan Hai – यह गुवाहाटी शहर से लगभग 8 किलोमीटर दूर है। Guwahati to Kamakhya Distance मात्र 20-25 मिनट की ड्राइव है।

Ambubachi Mela क्या है और क्यों मनाया जाता है?
Ambubachi Festival का नाम संस्कृत शब्द “अम्बु” (पानी) और “बाची” (बोलना) से आया है। Ambubachi Mela के दौरान माना जाता है कि Kamakhya Mata अपने वार्षिक रजस्वला (मासिक धर्म) से गुजरती हैं।
यह Kamakhya Temple Ambubachi Mela चार दिनों तक चलता है। इस दौरान मंदिर पूरी तरह बंद रहता है – न कोई पूजा होती है, न कोई भक्त अंदर जा सकता है। चौथे दिन जब मंदिर खुलता है, तो देवी को स्नान कराया जाता है और लाल वस्त्र पहनाए जाते हैं।
अंबुबाची के दौरान क्या होता है?
- मंदिर का बंद होना: पहले तीन दिन मंदिर पूरी तरह बंद रहता है
- खेती और खाना पकाना बंद: स्थानीय लोग जमीन नहीं जोतते और कुछ तांत्रिक साधक खाना भी नहीं बनाते
- तांत्रिक साधना: हजारों अघोरी और तांत्रिक साधक इस समय गहरी साधना करते हैं
- Periods Yoni Blood Kamakhya Temple: चौथे दिन मंदिर की चट्टान से एक लाल पानी की धारा बहती है, जिसे Kamakhya Devi Bleeding माना जाता है

Inside Kamakhya Temple: मंदिर के अंदर क्या है?
Inside Kamakhya Temple की यात्रा एक अनोखा अनुभव है। यहां कोई मूर्ति नहीं है – बल्कि एक प्राकृतिक चट्टान है जो योनि (गर्भ) के आकार की है। Kamakhya Temple Yoni एक गुफा में स्थित है जहां एक प्राकृतिक झरना हमेशा बहता रहता है।
कामाख्या देवी मंदिर का रहस्य यह है कि Ambubachi के दौरान यह पानी लाल हो जाता है। वैज्ञानिक इसे चट्टान में मौजूद लौह तत्व का प्रभाव बताते हैं, लेकिन भक्तों के लिए यह Period Menstrual Yoni Blood Kamakhya Temple की दिव्य घटना है।
Ambubachi Mela 2025: क्या उम्मीद करें?
Ambubachi Mela 2025 में 15 से 20 लाख श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। यह Kamakhya Temple Ambubachi Mela न सिर्फ असम बल्कि पूरे भारत का सबसे बड़ा तांत्रिक समागम है।
मेले की मुख्य विशेषताएं:
1. तांत्रिक साधकों का जमावड़ा हजारों अघोरी बाबा, नागा साधु और तांत्रिक Kamakhya Temple Ambubachi Mela में आते हैं। वे अपनी विशेष साधनाएं करते हैं और Kamakhya Kavach तथा अन्य तांत्रिक वस्तुएं बनाते हैं।
2. प्रसाद वितरण चौथे दिन जब मंदिर खुलता है, तो Maa Kamakhya Devi को लाल कपड़े में लपेटा जाता है। यह कपड़ा प्रसाद के रूप में बांटा जाता है, जिसे अंगोछा कहते हैं। इसे अत्यंत शुभ माना जाता है।
3. सांस्कृतिक कार्यक्रम Ambubachi के दौरान असमिया संगीत, नृत्य और लोक कला के कार्यक्रम होते हैं।

Kamakhya Temple History: मंदिर का इतिहास
Kamakhya Temple History हजारों साल पुराना है। माना जाता है कि यह मंदिर द्वापर युग से भी पहले का है। Who Built Kamakhya Temple – मूल मंदिर का निर्माण 8वीं-9वीं शताब्दी में कामरूप के म्लेच्छ वंश के राजाओं ने करवाया था।
Kamakhya Mandir Ka Itihas में कई उतार-चढ़ाव आए। 1553 में कालापहाड़ नामक मुस्लिम आक्रमणकारी ने मंदिर को नष्ट कर दिया। फिर 1565 में कूच बिहार के राजा नर नारायण और उनके सेनापति चिलराय ने Kamakhya Devi Mandir का पुनर्निर्माण करवाया।
Kamakhya Temple Story in Hindi के अनुसार, यह वही स्थान है जहां कामदेव को भगवान शिव ने भस्म किया था और बाद में उनकी पत्नी रति की प्रार्थना पर पुनर्जीवित किया।

Best Time to Visit Kamakhya Temple और Kamakhya Weather
Best Time to Visit Kamakhya Temple अक्टूबर से अप्रैल के बीच है। Kamakhya Weather इस समय सुहावना रहता है – तापमान 15-25°C के बीच रहता है।
गर्मियों में (मई-जून) Kamakhya Temple Ambubachi Mela होता है। यह समय सबसे गर्म होता है (30-35°C), लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ भी इसी समय होती है।
मानसून (जुलाई-सितंबर) में भारी बारिश होती है। Guwahati Kamakhya Mandir जाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
Kamakhya Temple Timings और Kamakhya Temple Tickets
| समय | विवरण |
|---|---|
| सुबह की आरती | 5:30 AM – 7:00 AM |
| दोपहर दर्शन | 8:00 AM – 1:00 PM |
| शाम दर्शन | 2:30 PM – 5:30 PM |
| Kamakhya Temple Ticket | नि:शुल्क (सामान्य कतार) |
| Kamakhya Temple Vip Ticket | ₹500-2000 |
| Kamakhya Temple Vip Pass | ऑनलाइन बुकिंग उपलब्ध |
Kamakhya Temple Vip Ticket Online Booking आधिकारिक असम पर्यटन वेबसाइट या Kamakhya Temple की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
कैसे पहुंचें Kamakhya Devi Mandir
हवाई मार्ग से:
Guwahati Airport to Kamakhya Temple Distance लगभग 25 किलोमीटर है। टैक्सी या कैब 45-60 मिनट में पहुंचा देती है।
रेल मार्ग से:
Kamakhya Junction या Kamakhya Station सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है। Kamakhya Railway Station से मंदिर मात्र 2 किलोमीटर दूर है। आप ऑटो, टैक्सी या पैदल भी जा सकते हैं।
Guwahati to Kamakhya Temple Distance लगभग 8 किलोमीटर है। शहर से टैक्सी, बस या ऑटो आसानी से मिल जाते हैं।
सड़क मार्ग से:
- Kamakhya to Guwahati Distance: 8 किमी
- Kamakhya to Shillong Distance: 100 किमी (2.5 घंटे)
- Kamakhya Devi Mandir Distance गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से 10 किमी
Hotels Near Kamakhya Temple: कहां रुकें?
Hotel Near Kamakhya Temple की कई अच्छी विकल्प हैं:
- बजट होटल्स (₹800-1500): मंदिर के आधार पर छोटे गेस्टहाउस
- मिड-रेंज होटल्स (₹2000-4000): Hotels Near Kamakhya Temple गुवाहाटी शहर में
- लक्जरी होटल्स (₹5000+): गुवाहाटी के प्रमुख इलाकों में
सुझाव: Ambubachi Mela 2025 Date के आसपास होटल 3-4 महीने पहले बुक कर लें। इस समय दरें 2-3 गुना बढ़ जाती हैं।
Kamakhya Devi Mantra और Kamakhya Stotram
Kamakhya Devi Mantra तंत्र साधना में अत्यंत महत्वपूर्ण है:
मुख्य मंत्र: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे”
Kamakhya Stotram का पाठ करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। Maa Kamakhya की कृपा से धन, संतान और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

Kamakhya Temple Menstruation: क्यों है यह मंदिर खास?
Kamakhya Temple Menstruation की अवधारणा पूरी दुनिया में अनोखी है। जबकि अधिकांश हिंदू मंदिरों में मासिक धर्म को अशुद्ध माना जाता है, Kamakhya Devi Temple Assam में इसे दिव्य और पवित्र माना जाता है।
Period Kamakhya Temple के दौरान मंदिर बंद नहीं होता क्योंकि मासिक धर्म अशुद्ध है, बल्कि इसलिए क्योंकि देवी को आराम की जरूरत है। यह नारी शक्ति का सम्मान है।
River Kamakhya Temple Blood की कहानी भी प्रचलित है। कहा जाता है कि Ambubachi के दौरान पास की ब्रह्मपुत्र नदी का पानी भी थोड़ा लाल हो जाता है।
Kamakhya Temple Assam: तांत्रिक साधना का केंद्र
Kamakhya Devi Temple Assam भारत का सबसे बड़ा तांत्रिक केंद्र है। Kamakhya Temple Ambubachi Mela के दौरान यहां हर तरह के तांत्रिक साधक आते हैं:
- अघोरी: जो श्मशान साधना करते हैं
- नागा साधु: जो निर्वस्त्र रहकर तपस्या करते हैं
- तांत्रिक: जो मंत्र, यंत्र और तंत्र की साधना करते हैं
Kamakhya Kavach (कवच) यहां बनाया जाता है, जो सुरक्षा के लिए पहना जाता है।

कामाख्या देवी मंदिर कैसे पहुंचे और कब जाना चाहिए?
कामाख्या देवी मंदिर कैसे पहुंचे – यह बहुत आसान है:
- हवाई मार्ग: गुवाहाटी एयरपोर्ट से टैक्सी/कैब
- ट्रेन: Kamakhya Junction या गुवाहाटी स्टेशन
- बस: असम राज्य परिवहन की बसें
कामाख्या मंदिर कब जाना चाहिए – सबसे अच्छा समय:
- नवरात्रि (मार्च-अप्रैल और सितंबर-अक्टूबर)
- Ambubachi Mela (जून)
- सर्दियों के महीने (नवंबर-फरवरी)
माँ कामाख्या टेम्पल: विशेष नियम और परंपराएं
माँ कामाख्या धाम में कुछ विशेष नियम हैं:
- फोटोग्राफी: गर्भगृह में फोटो खींचना सख्त मना है
- वेशभूषा: पारंपरिक कपड़े पहनना अनिवार्य है
- प्रसाद: बाहर से प्रसाद ले जाना मना है – यहीं से खरीदें
- मदिरा: तांत्रिक साधना में मदिरा का प्रयोग होता है, लेकिन सामान्य भक्तों के लिए वर्जित है
कामाख्या देवी की मूर्ति नहीं है – बल्कि एक प्राकृतिक पत्थर है।
Kamakhya Devi Story: देवी की कहानी
Kamakhya Devi Story बहुत रोचक है। Kamakhya Temple Story के अनुसार:
जब राजा दक्ष ने यज्ञ में भगवान शिव का अपमान किया, तो माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर प्राण त्याग दिए। शिव ने उनके शरीर को उठाकर तांडव शुरू कर दिया। पृथ्वी के विनाश को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में काट दिया।
Where is Kamakhya Temple – वह स्थान जहां योनि गिरी, वही Maa Kamakhya Devi Temple है।
Kamakhya Devi Temple Story in Hindi में यह भी कहा जाता है कि भगवान शिव ने यहां कामदेव को भस्म किया था और बाद में रति की प्रार्थना पर उन्हें पुनर्जीवित भी किया।

समापन: एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव
Kamakhya Temple Ambubachi Mela सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है – यह भारतीय संस्कृति में नारी शक्ति के सम्मान का प्रतीक है। यह मेला हमें सिखाता है कि मासिक धर्म कोई अभिशाप नहीं, बल्कि प्रकृति का एक पवित्र चक्र है।
Ambubachi 2025 में Maa Kamakhya Temple की यात्रा आपके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव होगी। चाहे आप भक्त हों, तांत्रिक साधक हों या सिर्फ जिज्ञासु पर्यटक – Kamakhya Temple Guwahati सबके लिए कुछ न कुछ खास है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Ambubachi Mela 2025 Date and Time क्या है?
Ambubachi Mela 2025 22 से 26 जून 2025 तक होगा। मंदिर 22 जून को बंद होगा और 26 जून को खुलेगा। पूरा मेला 30 जून तक चलेगा।
2. Kamakhya Temple में मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जा सकती हैं?
हां, बिल्कुल! Kamakhya Temple Menstruation के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह मंदिर मासिक धर्म को पवित्र मानता है।
3. Kamakhya Temple Vip Ticket Online Booking कैसे करें?
Kamakhya Temple Vip Ticket Online Booking असम पर्यटन की आधिकारिक वेबसाइट या मंदिर की वेबसाइट पर उपलब्ध है। VIP टिकट की कीमत ₹500 से ₹2000 के बीच है।
धन्यवाद और अधिक जानकारी
Kamakhya Temple Ambubachi Mela के बारे में यह विस्तृत जानकारी आपको पसंद आई होगी। अगर आप 2025 में इस दिव्य मेले में जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए बेहद उपयोगी साबित होगी।
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